यूपी और उत्तराखंड के सीएम रहे नारायण दत्त तिवारी का निधन, लंबी बीमारी के बाद जन्मदिन के दिन ही ली अंतिम सांस

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे नारायण दत्त तिवारी का 93 साल की उम्र में निधन हो गया है। उन्होंने दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। एनडी तिवारी का निधन उनके जन्मदिन के दिन हुआ है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एनडी तिवारी के निधन पर शोक जताया है।

उन्होंने ट्वीट किया, ‘उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री पंडित नारायण दत्त तिवारी के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त करता हूं। ईश्वर से उनकी दिवंगत आत्मा की शांति व परिजनों को दुःख सहने की प्रार्थना करता हूं।
आजादी के बाद हुए पहले विधानसभा चुनावों में तिवारी ने नैनीताल (उत्तर) से सोशलिस्ट पार्टी के बैनर तले चुनाव लड़ा था और कांग्रेस के खिलाफ जीत हासिल की थी। तिवारी ने 1963 में कांग्रेस ज्वाइन की थी। 1965 में तिवारी पहली बार मंत्री बने थे। तिवारी तीन बार यूपी और एक बार उत्तराखंड की सत्ता संभाल चुके हैं।

एनडी तिवारी का लंबा राजनीतिक इतिहास रहा है। स्वतंत्रता संग्राम के वक्त तिवारी ने भी आजादी की लड़ाई में अपना योगदान दिया था। 1942 में वे जेल भी जा चुके हैं खास बात यह थी कि वे नैनीताल जेल में बंद किए थे जहां उनके पिता पूर्णानंद तिवारी पहले से ही बंद थे। आजादी के वक्त तिवारी इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्र संघ के अध्यक्ष बने थे।

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने वरिष्ठ राजनेता श्री नारायण दत्त तिवारी जी के निधन का दु:खद समाचार प्राप्त हुआ। तिवारी जी ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष किया, वह तीन बार उत्तर प्रदेश के और एक बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे। उनका निधन भारतीय राजनीति के लिए एक अपूर्णीय क्षति है।
एन डी तिवारी के निधन पर उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि देश ने एक सच्चा विकास पुरुष खो दिया। उन्होंने कहा कि एन डी तिवारी ने उत्तर प्रदेश के विकास में अहम भूमिका निभाई थी। उनके निधन से जो क्षति हुई है उसकी भरपाई कर पाना संभव नहीं होगा।

एन डी तिवारी आंध्र प्रदेश के राज्यपाल भी थे और सेक्स कांड की वजह से उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। इसके साथ ही रोहित शेखर  नाम के शख्स ने उन्हें अपना पिता होने का दावा किया था। इस सिलसिले में उनकी काफी किरकिरी हुई थी। ये मामला अदालत के दरवाजे तक गया और रोहित के दावे को पुख्ता करने के लिए अदालत ने डीएनए टेस्ट का आदेश दिया था। लेकिन जांच के लिए वो ब्लड देने से आनाकानी करते रहे। 

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